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आज पत्रकारिता व्यवसायिक घरानों के कब्जे में लगभग समा चुकी है। यहां तक कि कुछ व्यवसायिक घरानों की तो पारिवारिक विरासत तक बन चुकी है। ऐसे में च्न्ठस्प्ब् ॅ।ज्ब्भ् एक स्वच्छ पत्रकारिता, पत्रकार और पाठक को महत्व देने के लिए आपके सामने एक चुनौती बन कर आया है। एक ऐसा मीडिया संस्थान जहां अख़बार, मीडिया वेबसाइट या यू-टयूब चैनल में पत्रकारों की नियुक्ति से लेकर स्टोरी एवं ख़बरों के चयन में पाठक एवं पत्रकारिता को ध्यान में रखकर ही निर्णय लिया जाएगा न कि सियासत, सियासी नेता या विज्ञानदाता को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता दी जाएगी। लोकतंत्र देश एवं लोकतांत्रिक प्रणाली में जनता मीडिया से इतनी उम्मीद तो करती ही है। हांलांकि हमारे देश भारत में जो विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में से एक है जहां मीडिया के वर्तमान माहौल में संपादकों और पत्रकारों को ऐसी आज़ादी का सामना करने में अड़चनें भी निश्चित तौर पर आ रही है।
देखा जाए तो वक़्त के साथ-साथ पत्रकारिता का स्तर अब रसातल की ओर जाता दिख रहा है। स्थितियां और ख़राब होती जा रहीं हैं। अब पत्रकारिता अपनी मूल व्यवस्था से हट कर ग़लत प्रचलन को अपनाती जा रही है। जैसे ख़बरों को ग़ैर-ज़रूरी तरीक़े से संपादित करना, पेड न्यूज़, निजी संबंधों के लाभ के लिए कुछ ख़बरों को चलाना आदि। इसका प्रमुख कारण यह है कि दरअसल अब मीडिया संस्थान ख़बरों तक पहुंचाना ही नहीं चाहती उसके उलट उन्होंने पत्रकारिता की आड़ में व्यापारिक समझौते करने शुरू कर दिये हैं। कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं और ख़बरें तो जनता तक पहुंचती ही नहीं हैं क्योंकि मीडिया संस्थान उन्हें किसी व्यक्ति या संस्था विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सामने लाना ही नहीं चाहती। अब तो सोशल मीडिया की जागरूकता के कारण आमजन मानस काफ़ी हद तक सचेत एवं जागरूक हो रहे हैं साथ ही इस बात को समझने लगे हैं कि पत्रकारिता की मूल व्यवस्था ख़तरे में पड़ती जा रही है। देखा जाए तो आम जन मानस का मीडिया पर से भरोसा भी कम होता जा रहा है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। वहीं मीडिया जो लोकतंत्र का ’’चौथा स्तंभ’’ होने का दम भरती थी वही अपना दम तोड़ती नज़र आ रही है जिससे इसकी विश्वसनीयता भी ख़त्म होती जा रही है। पत्रकारिता और मीडिया संस्थान को एक दिशा देने के उद्देश्य से ही च्न्ठस्प्ब् ॅ।ज्ब्भ् को अस्तित्व में लाने का प्रयास किया जा रहा है। च्न्ठस्प्ब् ॅ।ज्ब्भ् अंग्रेज़ी दैनिक संस्करण के साथ-साथ च्न्ठस्प्ब् ॅ।ज्ब्भ् का अंग्रेज़ी वेब न्यूज़ पोर्टल भी लाने का प्रयास करेंगे। हमारा यह मानना है कि यदि पत्रकारिता को बचाय रखना है तो इसे संपादकीय और आर्थिक स्वतंत्रता तो देनी ही होगी। इसका एक ही रास्ता है कि आम जन मानस भी इसका हिस्सा बनें। जो पाठक ऐसी पत्रकारिता को जिं़दा रखना चाहते हैं या सच्चाई तक पहंुचना चाहते हैं और साथ ही चाहते हैं कि उन तक हर ख़बर पूरी स्वच्छता एवं साफ़गोई के साथ पहुंचे तो हमाराा साथ उन्हें देना होगा। आम जन मानस को चाहिए कि इसे अपना दायित्व और नैतिक ज़िम्मेदारी समझते हुए हमारे संस्थान की मदद करे क्योंकि च्न्ठस्प्ब् ॅ।ज्ब्भ् जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि रखने के लिए प्रतिबद्ध है। ख़बरों के विश्लेषण और उन पर टिप्पणी देने के अलावा हमारा उद्देश्य रिपोर्टिंग के पारंपरिक स्वरूप को बचाये रखने का भी है। हमारे संसाधन जैसे-जैसे बढ़ेंगे हमारी टी म ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचने की कोशिश करेगी। इस लक्ष्य एवं उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए हमारा यह छोटा ही सही पर यक़ीनन एक महत्वपूर्ण क़दम होगा। पत्रकारिता को सही स्वरूप और दिशा देने में आर्थिक एवं ज़रूरी संसाधन की अनउपलब्धता हमारी बाधा ज़रूर है लेकिन हमारे दृढ़ इरादे की उपलब्धता के आगे यह बाधा दूर होगी। हमारी अपने पाठकों से बस इतनी सी गुज़राशि है कि इसे और भी बेहतर करने में हमारा हर प्रकार से सहयोग करें, हमारी ख़बरों, स्टोरीज़ को पढ़ें शेयर करें और हर हो सके तो हमें सुझाव भी दें। ’’आप हमारे महत्वपूर्ण सहपाठी हैं।’’ मोहम्मद ज़ाहिद अख़तर च्न्ठस्प्ब् ॅ।ज्ब्भ् अंग्रेज़ी दैनिक अख़बार तथा न्यूज़ पोर्टल के संपादक हैं। अपने 19 वर्ष की पत्रकारिता के सफ़र में मोहम्मद ज़ाहिद अख़्तर कई हिंदी प्रिंट मीडिया जिसमें दैनिक, सामप्ताहिक तथा मासिक पत्रिका शामिल है में अपनी लेखनी से पत्रकारिता जगत में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे चुके हैं। मोहम्मद ज़ाहिद अख़्तर एक स्क्रीप्ट राइटर, लघु फिल्म निर्देशक के तौर पर भी काम कर चुके हैं। मेडिकल कोरस्पोंडेंट से लेकर राजनैतिक संवाददाता के तौर पर भी कार्य कर चुके हैं। कई विधायक, सांसद, मंत्री के अलावा यूपी तथा मिज़ोरम के राज्यपाल का साक्षात्कार कर चुके हैं। ब्यूरोक्रेटस्(आईएएस/आईपीएस), चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े चिकित्सकों, नामचीन खिलाड़ियों तथा फिल्मीकलाकारों का साक्षात्कार कर चुके मोहम्मद ज़ाहिद अख़्तर डिजिटल मीडिया में भी अपना योगदान दे चुके हैं। पत्रकारिता एवं लेखनी में एक अरसा बिताने के बाद अब स्वयं का अंग्रेज़ी दैनिक अख़बार, न्यूज़ पोर्टल, यूटयूब चैनल तथा ज्भ्म् स्म्ळ।ब्ल् ज्प्डम्ै मासिक पत्रिका का संपादन भी कर रहे हैं।